Shri Laxmi Chalisa
Introduction
Shri Laxmi Chalisa is a devotional hymn dedicated to Goddess Lakshmi, the divine goddess of wealth, prosperity, fortune, beauty, peace, and abundance. Devotees recite Laxmi Chalisa to seek blessings for financial stability, happiness, success, and a peaceful home.
Goddess Lakshmi is worshipped as the consort of Lord Vishnu and is believed to bring spiritual and material prosperity when prayed to with devotion, purity, and gratitude.
Quick Information About Shri Laxmi Chalisa
Detail Information
Name : Shri Laxmi Chalisa
Deity : Goddess Laxmi (Mahalaxmi)
Category: Hindu Devotional Chalisa
Language : Hindi
Best Day : Friday
Best Time : Morning or Evening
Associated Festival: Diwali, Dhanteras, Sharad Purnima
Reading Duration: 5–10 Minutes
Main Purpose : Devotion, Gratitude, Prosperity, Spiritual Growth
Suitable : For All Devotees
Laxmi Chalisa in Hindi Lyrics
श्री लक्ष्मी चालीसा हिंदी में अर्थ सहित
दोहा
मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास ।
मनोकामना सिद्ध करि, परुवहु मेरी आस ॥
अर्थ: हे माता लक्ष्मी! मुझ पर कृपा करके मेरे हृदय में निवास करें। मेरी सभी शुभ इच्छाएँ पूर्ण करें और मेरी आशाओं को सफल बनाएं।
सोरठा
यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं ।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदम्बिका ॥
अर्थ: हे जगदम्बा! मैं हाथ जोड़कर आपसे प्रार्थना करता हूँ कि मेरे जीवन को सुख, शांति और मंगल से भर दें।
चौपाई
सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही ।
ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोही ॥
तुम समान नहिं कोई उपकारी ।
सब विधि पुरवहु आस हमारी ॥
जय जय जगत जननि जगदम्बा ।
सबकी तुम ही हो अवलम्बा ॥
तुम ही हो सब घट घट वासी ।
विनती यही हमारी खासी ॥
अर्थ: हे समुद्र की पुत्री माता लक्ष्मी! मैं आपका स्मरण करता हूँ। मुझे ज्ञान, बुद्धि और विद्या प्रदान करें। आपके समान कोई उपकार करने वाला नहीं है। आप सभी की माता हैं और पूरे संसार का सहारा हैं। आप प्रत्येक जीव के हृदय में निवास करती हैं। मेरी प्रार्थना है कि आप मेरी इच्छाएँ पूर्ण करें।
चौपाई
जगजननी जय सिन्धु कुमारी ।
दीनन की तुम हो हितकारी ॥
विनवौं नित्य तुमहिं महारानी ।
कृपा करौ जग जननि भवानी ॥
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी ।
सुधि लीजै अपराध बिसारी ॥
कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी ।
जगजननी विनती सुन मोरी ॥
अर्थ: हे जगत की माता और समुद्र कन्या! आप गरीबों और दुखियों का कल्याण करती हैं। मैं प्रतिदिन आपसे प्रार्थना करता हूँ कि मुझ पर कृपा करें। मैं आपकी महिमा का वर्णन करने में असमर्थ हूँ, इसलिए मेरे दोषों को क्षमा करके मेरी प्रार्थना स्वीकार करें।
चौपाई
ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता ।
संकट हरो हमारी माता ॥
क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो ।
चौदह रत्न सिन्धु में पायो ॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी ।
सेवा कियो प्रभु बनि दासी ॥
जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा ।
रुप बदल तहं सेवा कीन्हा ॥
अर्थ: माता लक्ष्मी ज्ञान, बुद्धि और सुख देने वाली हैं तथा भक्तों के संकट दूर करती हैं। समुद्र मंथन के समय चौदह रत्न निकले, जिनमें माता लक्ष्मी सबसे श्रेष्ठ थीं। भगवान विष्णु ने जब-जब अवतार लिया, तब-तब माता लक्ष्मी ने भी विभिन्न रूप धारण करके उनकी सेवा की।
चौपाई
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा ।
लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा ॥
तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं ।
सेवा कियो हृदय पुलकाहीं ॥
अपनाया तोहि अन्तर्यामी ।
विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी ॥
तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी ।
कहं लौ महिमा कहौं बखानी ॥
अर्थ: जब भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया, तब माता लक्ष्मी सीता जी के रूप में प्रकट हुईं। भगवान ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी बनाया। तीनों लोकों में उनकी महिमा प्रसिद्ध है और उनके समान कोई दूसरी शक्तिशाली देवी नहीं है।
चौपाई
मन क्रम वचन करै सेवकाई ।
मन इच्छित वांछित फल पाई ॥
तजि छल कपट और चतुराई ।
पूजहिं विविध भांति मनलाई ॥
और हाल मैं कहौं बुझाई ।
जो यह पाठ करै मन लाई ॥
ताको कोई कष्ट नोई ।
मन इच्छित पावै फल सोई ॥
अर्थ: जो भक्त मन, कर्म और वचन से माता लक्ष्मी की सेवा करता है, उसे मनचाहा फल प्राप्त होता है। जो व्यक्ति छल-कपट छोड़कर सच्चे मन से उनकी पूजा करता है और श्रद्धा से इस चालीसा का पाठ करता है, उसके कष्ट दूर होते हैं तथा उसकी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।
चौपाई
त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि ।
त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी ॥
जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै ।
ध्यान लगाकर सुनै सुनावै ॥
ताकौ कोई न रोग सतावै ।
पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै ॥
पुत्रहीन अरु सम्पति हीना ।
अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना ॥
अर्थ: हे दुःखों को दूर करने वाली माता! आप संसार के सभी कष्टों और बंधनों को समाप्त करती हैं। जो व्यक्ति श्रद्धा और ध्यानपूर्वक लक्ष्मी चालीसा का पाठ करता है या दूसरों को सुनाता है, उसे रोग परेशान नहीं करते और उसे संतान, धन तथा सुख-सम्पत्ति प्राप्त होती है। यह चालीसा दुःखी और अभावग्रस्त लोगों के लिए भी कल्याणकारी मानी गई है।
चौपाई
विप्र बोलाय कै पाठ करावै ।
शंका दिल में कभी न लावै ॥
पाठ करावै दिन चालीसा ।
ता पर कृपा करैं गौरीसा ॥
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै ।
कमी नहीं काहू की आवै ॥
बारह मास करै जो पूजा ।
तेहि सम धन्य और नहिं दूजा ॥
अर्थ: जो व्यक्ति श्रद्धा के साथ किसी विद्वान ब्राह्मण से इस चालीसा का पाठ करवाता है और मन में कोई संदेह नहीं रखता, उस पर देवी की कृपा बनी रहती है। उसे सुख, समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है तथा उसके जीवन में किसी वस्तु की कमी नहीं रहती। जो पूरे वर्ष माता की भक्ति करता है, वह अत्यंत भाग्यशाली माना जाता है।
चौपाई
प्रतिदिन पाठ करै मन माही ।
उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं ॥
बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई ।
लेय परीक्षा ध्यान लगाई ॥
करि विश्वास करै व्रत नेमा ।
होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा ॥
जय जय जय लक्ष्मी भवानी ।
सब में व्यापित हो गुण खानी ॥
अर्थ: जो व्यक्ति प्रतिदिन श्रद्धा से लक्ष्मी चालीसा का पाठ करता है, वह संसार में सम्मान और पुण्य प्राप्त करता है। माता की महिमा इतनी महान है कि उसका पूरा वर्णन करना कठिन है। जो विश्वास और नियमपूर्वक भक्ति करता है, उसकी साधना सफल होती है और उसके हृदय में सच्ची भक्ति उत्पन्न होती है। माता लक्ष्मी सभी गुणों की खान हैं और सम्पूर्ण संसार में व्याप्त हैं।
चौपाई
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं ।
तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं ॥
मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै ।
संकट काटि भक्ति मोहि दीजै ॥
भूल चूक करि क्षमा हमारी ।
दर्शन दजै दशा निहारी ॥
बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी ।
तुमहि अछत दुःख सहते भारी ॥
अर्थ: माता लक्ष्मी का तेज पूरे संसार में फैला हुआ है और उनके समान दयालु कोई नहीं है। भक्त विनती करता है कि माता उसकी रक्षा करें, उसके संकट दूर करें और उसे भक्ति प्रदान करें। वह अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगता है और माता से दर्शन देने की प्रार्थना करता है। माता के दर्शन के बिना भक्त का मन व्याकुल रहता है।
चौपाई
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में ।
सब जानत हो अपने मन में ॥
रुप चतुर्भुज करके धारण ।
कष्ट मोर अब करहु निवारण ॥
केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई ।
ज्ञान बुद्धि मोहि नहिं अधिकाई ॥
(चालीसा की अंतिम विनम्र प्रार्थना)
अर्थ: भक्त कहता है कि उसके पास पर्याप्त ज्ञान और बुद्धि नहीं है, लेकिन माता सब कुछ जानती हैं। वह चतुर्भुज स्वरूप वाली माता लक्ष्मी से प्रार्थना करता है कि उसके सभी दुःख और कष्ट दूर करें। अंत में वह विनम्रता से स्वीकार करता है कि उसकी बुद्धि माता की महिमा का पूर्ण वर्णन करने में सक्षम नहीं है।
अंतिम दोहा
त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास ।
जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश ॥
अर्थ: हे दुःखों का नाश करने वाली माता लक्ष्मी! मेरे सभी भय, कष्ट और परेशानियों को शीघ्र दूर करें तथा शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों का नाश करें।
रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर ।
मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर ॥
अर्थ: भक्त रामदास प्रतिदिन माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए हाथ जोड़कर प्रार्थना करता है कि हे माता! अपने भक्तों पर सदैव कृपा और आशीर्वाद बनाए रखें।
श्री लक्ष्मी चालीसा
परिचय
श्री लक्ष्मी चालीसा माता लक्ष्मी को समर्पित एक पवित्र भक्तिमय स्तुति है। माता लक्ष्मी को धन, समृद्धि, सौभाग्य, सुख, शांति और वैभव की देवी माना जाता है। भक्त श्रद्धा से लक्ष्मी चालीसा का पाठ करके घर में सुख, धन, सकारात्मक ऊर्जा और पारिवारिक शांति की कामना करते हैं।
माता लक्ष्मी भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं और सनातन धर्म में उन्हें कृपा, ऐश्वर्य और मंगल की देवी के रूप में पूजा जाता है।
त्वरित जानकारी
नाम: श्री लक्ष्मी चालीसा
देवी: महालक्ष्मी
भाषा: हिंदी
शुभ दिन: शुक्रवार
मुख्य उद्देश्य: भक्ति, समृद्धि और सकारात्मक जीवन
पाठ अवधि: लगभग 5 से 10 मिनट
Frequently Asked Questions
What is Shri Laxmi Chalisa?
English Answer: Shri Laxmi Chalisa is a devotional hymn consisting of 40 verses dedicated to Goddess Lakshmi. It praises her divine qualities and seeks her blessings for prosperity, happiness, and peace.
श्री लक्ष्मी चालीसा क्या है?
हिंदी उत्तर: श्री लक्ष्मी चालीसा माता लक्ष्मी को समर्पित 40 चौपाइयों वाली एक भक्तिमय स्तुति है। इसमें उनकी महिमा का वर्णन किया गया है और सुख, समृद्धि तथा शांति की प्रार्थना की जाती है।
When should I read Laxmi Chalisa?
English Answer: Laxmi Chalisa can be recited daily. Fridays, Diwali, Dhanteras, Lakshmi Puja, and Akshaya Tritiya are considered especially auspicious for its recitation.
लक्ष्मी चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
हिंदी उत्तर: लक्ष्मी चालीसा का पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है। शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस, लक्ष्मी पूजन और अक्षय तृतीया इसके पाठ के लिए विशेष शुभ माने जाते हैं।
What are the benefits of reading Laxmi Chalisa?
English Answer: Devotees believe that reading Laxmi Chalisa brings prosperity, peace, financial stability, positive energy, family harmony, and spiritual growth.
लक्ष्मी चालीसा पढ़ने के क्या लाभ हैं?
हिंदी उत्तर: श्रद्धा से लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से समृद्धि, शांति, आर्थिक स्थिरता, सकारात्मक ऊर्जा, पारिवारिक सुख और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होने की मान्यता है।
What is the meaning of Laxmi Chalisa?
English Answer: Laxmi Chalisa is a prayer that glorifies Goddess Lakshmi and seeks her blessings for wealth, wisdom, success, purity, and abundance.
लक्ष्मी चालीसा का अर्थ क्या है?
हिंदी उत्तर: लक्ष्मी चालीसा माता लक्ष्मी की स्तुति और वंदना है, जिसके माध्यम से धन, बुद्धि, सफलता, पवित्रता और समृद्धि की कामना की जाती है।
Why is Laxmi Chalisa important?
English Answer: Laxmi Chalisa reminds devotees that true prosperity includes not only wealth but also peace, good values, health, and contentment.
लक्ष्मी चालीसा का महत्व क्या है?
हिंदी उत्तर: लक्ष्मी चालीसा हमें यह सिखाती है कि सच्ची समृद्धि केवल धन नहीं बल्कि शांति, स्वास्थ्य, सद्गुण और संतोष भी है।
What should I offer to Goddess Lakshmi?
English Answer: Lotus flowers, red flowers, sweets, fruits, rice, coconut, kheer, incense, diya, and clean water are commonly offered to Goddess Lakshmi.
माता लक्ष्मी को क्या अर्पित करना चाहिए?
हिंदी उत्तर: माता लक्ष्मी को कमल का फूल, लाल फूल, मिठाई, फल, चावल, नारियल, खीर, धूप, दीपक और स्वच्छ जल अर्पित किया जाता है।
Who is the deity of Laxmi Chalisa?
English Answer: The deity worshipped in Laxmi Chalisa is Goddess Lakshmi, also known as Mahalakshmi, the goddess of wealth, fortune, prosperity, and divine grace.
लक्ष्मी चालीसा की आराध्य देवी कौन हैं?
हिंदी उत्तर: लक्ष्मी चालीसा की आराध्य देवी माता लक्ष्मी हैं, जिन्हें महालक्ष्मी भी कहा जाता है। वे धन, सौभाग्य, समृद्धि और कृपा की देवी हैं।
On which special occasions is Laxmi Chalisa recited?
English Answer: Laxmi Chalisa is commonly recited on Fridays, Diwali, Dhanteras, Kojagiri Purnima, Akshaya Tritiya, Navratri, and during housewarming ceremonies
लक्ष्मी चालीसा किन विशेष अवसरों पर पढ़ी जाती है?
हिंदी उत्तर: लक्ष्मी चालीसा का पाठ शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस, कोजागरी पूर्णिमा, अक्षय तृतीया, नवरात्रि तथा गृह प्रवेश जैसे शुभ अवसरों पर किया जाता है।
Who wrote Shri Laxmi Chalisa?
English Answer: The exact author of Shri Laxmi Chalisa is not clearly known. It is a traditional devotional composition that has been passed down through generations.
श्री लक्ष्मी चालीसा के रचयिता कौन हैं?
हिंदी उत्तर: श्री लक्ष्मी चालीसा के रचयिता के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह एक पारंपरिक भक्तिमय रचना है जो पीढ़ियों से प्रचलित है।
What are the dos and don’ts of reading Laxmi Chalisa?
English Answer: One should maintain cleanliness, light a diya, and recite with devotion and respect. Avoid anger, greed, negative thoughts, and disrespect during worship.
लक्ष्मी चालीसा पढ़ते समय क्या करें और क्या न करें?
हिंदी उत्तर: पाठ करते समय स्वच्छता रखें, दीपक जलाएं और श्रद्धा से पाठ करें। क्रोध, लालच, नकारात्मक विचार और अनादर से बचना चाहिए।
Conclusion
Shri Laxmi Chalisa is a timeless devotional hymn that inspires faith, gratitude, discipline, and spiritual growth. Dedicated to Mata Laxmi, the Goddess of Prosperity and Auspiciousness, this sacred prayer reminds devotees that true abundance includes wisdom, contentment, virtue, and devotion.
Whether you are a lifelong devotee or reading it for the first time, Shri Laxmi Chalisa offers a meaningful path toward spiritual enrichment, inner peace, and divine blessings.
Key Facts:
– महालक्ष्मी धन एवं समृद्धि की देवी हैं।
– शुक्रवार को विशेष पूजा की जाती है।
– दीपावली का पर्व माता लक्ष्मी से विशेष रूप से जुड़ा है।
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